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नरक चतुर्दशी 2025: कब है छोटी दिवाली और क्यों जलाया जाता है यमराज के नाम का दीपक?

नरक चतुर्दशी 2025: कब है छोटी दिवाली और क्या है इसका महत्व

नरक चतुर्दशी का पर्व दीपावली के ठीक एक दिन पहले आता है। इसे छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी या काली चौदस भी कहा जाता है। यह त्योहार हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस शुभ तिथि पर दीपदान और स्नान का विशेष महत्व है।


तिथि और शुभ मुहूर्त (Important Dates)

हिन्दू पंचांग के अनुसार नरक चतुर्दशी की तिथि इस प्रकार है:

विवरण (Detail)तिथि/समय (Date/Time)महत्व (Significance)
तिथिकार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशीछोटी दिवाली का दिन
त्योहार का नामनरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)दीपोत्सव का दूसरा दिन
अभ्यंग स्नान का मुहूर्तब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले)पापों से मुक्ति हेतु

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इस पावन पर्व पर शुभ मुहूर्त में स्नान करना बेहद कल्याणकारी माना गया है।


नरकासुर वध की पौराणिक कहानी

नरक चतुर्दशी को मनाने के पीछे एक बड़ी और महत्वपूर्ण कथा है।

  • नरकासुर का आतंक: प्राचीन काल में नरकासुर नामक असुर ने तीनों लोकों में भयंकर आतंक मचा रखा था।
  • 16000 महिलाओं का अपहरण: उसने देवताओं और मनुष्यों की 16,000 महिलाओं को बंधक बना लिया था।
  • श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा: देवताओं की प्रार्थना पर भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करने का निर्णय लिया।
  • सत्यभामा द्वारा वध: नरकासुर को ब्रह्माजी से यह वरदान था कि वह केवल एक स्त्री के हाथों से मरेगा
  • असुर का अंत: तब श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को युद्ध में शामिल किया, जिन्होंने नरकासुर का वध किया।

इस विजय के उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है।


यम दीपदान और अभ्यंग स्नान का महत्व

नरक चतुर्दशी पर दो विशेष रीति-रिवाज का पालन किया जाता है।

1. यम दीपदान

  • दीपदान का कारण: इस दिन धर्मराज यम के लिए दीपक जलाया जाता है।
  • फायदा: इसे यम दीपदान कहा जाता है, जो अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाता है।
  • स्थान: यह दीपक संध्या के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है।

2. अभ्यंग स्नान

  • शुभ स्नान: नरकासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण ने मंगल स्नान किया था।
  • विधि: इस दिन सूर्योदय से पहले तेल और उबटन लगाकर स्नान करना शुभ माना जाता है।
  • पुण्य: मान्यता है कि अपामार्ग के पत्तों को पानी में डालकर स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

यह स्नान और दीपदान सुख-समृद्धि लाते हैं।

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