
भारत डिजिटल क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह दावा लगातार किया जाता है। लेकिन इंडियन मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में जारी GSMA की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, आज भी भारत की लगभग आधी आबादी (47%) इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करती है। यह आंकड़ा ‘डिजिटल भारत’ के सपने के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। खासकर ग्रामीण इलाकों और महिलाओं में यह डिजिटल खाई बहुत गहरी है। इस रिपोर्ट ने सरकार और तकनीकी कंपनियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
डिजिटल असमानता: ग्रामीण और शहरी अंतर
भारत में इंटरनेट की पहुंच में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा अंतर है।
- ग्रामीण भारत: यहां इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत कम है।
- बुनियादी ढांचा: ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभाव है।
- जागरूकता: लोगों में इंटरनेट के फायदों के प्रति पर्याप्त जागरूकता नहीं है।
महिलाओं की डिजिटल भागीदारी कम क्यों?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाओं की डिजिटल भागीदारी पुरुषों की तुलना में काफी कम है।
मुख्य कारण
- साक्षरता और शिक्षा: कम शिक्षा और साक्षरता दर एक बड़ा कारण है।
- सामाजिक रूढ़िवादिता: महिलाओं को इंटरनेट उपयोग करने से कई बार रोका जाता है।
- आर्थिक अभाव: महिलाओं के पास अक्सर इंटरनेट डिवाइस या डेटा खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएं: ऑनलाइन सुरक्षा की चिंताएं भी एक बाधा है।
सरकार और उद्योग के लिए चुनौतियां
इस रिपोर्ट से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
- कनेक्टिविटी बढ़ाना: दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है।
- डिजिटल साक्षरता: लोगों को इंटरनेट का उपयोग करना सिखाना जरूरी है।
- महिलाओं की भागीदारी: महिलाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना होगा।
- किफायती पहुंच: इंटरनेट को सभी के लिए किफायती बनाना होगा।
यह रिपोर्ट भारत को एक सच्चा डिजिटल राष्ट्र बनाने के लिए नई रणनीतियों पर विचार करने का अवसर देती है।




