
करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात में चांद देखकर ही व्रत तोड़ा जाता है। छत्तीसगढ़ में भी इस त्योहार को बड़ी धूमधाम और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। यहां के प्रमुख शहरों में चांद निकलने का समय अलग-अलग होता है। इसलिए, पूजा शुरू करने से पहले चंद्रोदय का सटीक समय जानना बहुत जरूरी है।
व्रत का महत्व और पूजा विधि
करवा चौथ का पर्व कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत नारी शक्ति और पतिव्रता धर्म को दर्शाता है।
व्रत का धार्मिक महत्व
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से पति को दीर्घायु प्राप्त होती है।
- माता पार्वती ने भी भगवान शिव के लिए यह व्रत रखा था, इसलिए यह व्रत अखंड सौभाग्य प्रदान करता है।
- करवा चौथ की कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पूजा की सही विधि
- सुबह सवेरे स्नान करके सरगी खाकर व्रत का संकल्प लें।
- शाम को शुभ मुहूर्त में दीवार पर या बाजार से लाए करवा चौथ के चित्र की पूजा करें।
- करवा चौथ की कथा सुनें या पढ़ें।
- चांद निकलने पर छलनी से पहले चांद और फिर पति का चेहरा देखें।
- पति के हाथों से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय
ज्योतिष गणना के अनुसार, छत्तीसगढ़ में करवा चौथ पर चांद निकलने का समय इस प्रकार रहेगा। सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग को जरूर देखें।
| शहर का नाम (City Name) | चंद्रोदय का अनुमानित समय (Moonrise Time) |
| रायपुर (Raipur) | रात 08:05 PM |
| बिलासपुर (Bilaspur) | रात 08:02 PM |
| दुर्ग (Durg) | रात 08:08 PM |
| भिलाई (Bhilai) | रात 08:07 PM |
| राजनांदगांव (Rajnandgaon) | रात 08:10 PM |
| जगदलपुर (Jagdalpur) | रात 07:58 PM |
| कोरबा (Korba) | रात 07:59 PM |
| रायगढ़ (Raigarh) | रात 07:56 PM |
| अंबिकापुर (Ambikapur) | रात 07:54 PM |
| धमतरी (Dhamtari) | रात 08:06 PM |
नोट: मौसम और क्षेत्रीय स्थान के कारण सटीक समय में थोड़ा सा अंतर आ सकता है।
व्रत में किन बातों का ध्यान रखें?
व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है। ये नियम व्रत के पुण्य फल को बढ़ाते हैं।
- सरगी का महत्व: सरगी सूर्योदय से पहले खा लेनी चाहिए। इसमें फल, मिठाई और पानी शामिल होता है।
- जल का त्याग: व्रत पूरा होने तक पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। निर्जला व्रत का पालन करें।
- शुभ वस्त्र: पूजा के समय शुभ और नए वस्त्र धारण करने चाहिए। लाल, पीला या हरा रंग शुभ माना जाता है।
- शुभ मुहूर्त: पूजा हमेशा शुभ मुहूर्त में ही शुरू करनी चाहिए। इससे व्रत का पूरा फल मिलता है।
- झगड़ा न करें: किसी से भी झगड़ा या वाद-विवाद करने से बचें। मन को शांत रखें।
करवा चौथ का यह पावन पर्व आपके जीवन में खुशियां और सौभाग्य लेकर आए।




