बैंकिंग: FD पर कम हुआ ब्याज, अब कितना मिलेगा रिटर्न?
Banking सेक्टर में बदलाव लगातार हो रहे हैं। इस बार इंडियन ओवरसीज बैंक ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के इंटरेस्ट रेट में बदलाव किया है। यह बदलाव 15 सितंबर 2025 से लागू हो गया है। कुछ खास समय अवधि पर अब कम रिटर्न मिलने वाला है। यह खबर उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। जो अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
किन टेन्योर पर कम हुआ ब्याज?
पहले 121 से 179 दिनों की FD पर 3.50% ब्याज मिलता था। अब यह घटकर 3% हो गया है। इसी तरह 61 से 90 दिनों की FD पर भी 0.50% की कमी आई है। बैंक अब 444 दिनों के FD पर भी कम रिटर्न दे रहा है। पहले इस पर 6.75% ब्याज मिलता था। अब यह 6.70% हो गया है। यह निवेशकों के लिए एक छोटा झटका है।
अब मिल रहा है इतना ब्याज
नए बदलाव के बाद 7 दिन से लेकर 3 साल की FD पर सामान्य ग्राहकों को 3.50% से 6.70% तक ब्याज मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों को 0.50% अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। सुपर सीनियर सिटीजंस को 0.75% अधिक रिटर्न मिलेगा। FD में कम से कम 1 लाख रुपये का निवेश कर सकते हैं।
FD के नए इंटरेस्ट रेट
- 7 से 14 दिन: 3.50%
- 15 से 29 दिन: 3.50%
- 30 से 45 दिन: 3.50%
- 46 से 60 दिन: 4%
- 61 से 90 दिन: 3%
- 91 से 120 दिन: 3.50%
- 121 से 179 दिन: 3%
- 180 से 269 दिन: 5%
- 270 दिन से 1 साल से कम: 5.50%
- 1 साल: 6.60%
- 444 दिन: 6.70%
- 2 साल से 3 साल से कम: 6.50%
- 3 साल और इससे अधिक: 6.20%
सबसे ज्यादा ब्याज किस पर?
बैंक में सबसे ज्यादा ब्याज 444 दिनों की FD पर मिल रहा है। सामान्य ग्राहकों को 6.70% और वरिष्ठ नागरिकों को 7.20% का रिटर्न मिलेगा। वहीं 1 साल की FD पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस पर अभी भी 6.60% ब्याज मिल रहा है। यह दर वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7.10% है।
क्यों हो रहे हैं ये बदलाव?
FD की ब्याज दरें बाजार की स्थिति पर निर्भर करती हैं। जब RBI रेपो रेट में बदलाव करता है तो बैंक भी अपनी दरों में संशोधन करते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। बैंक अपने वित्तीय स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए ऐसा करते हैं। इसका सीधा असर ग्राहकों के रिटर्न पर पड़ता है। निवेशकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
निवेशकों के लिए सलाह
ब्याज दरें घटने पर निवेशक परेशान हो जाते हैं। लेकिन उन्हें अन्य विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। छोटी अवधि की FD की जगह लंबी अवधि में निवेश कर सकते हैं। इससे उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सकता है। अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करना भी जरूरी है। अपने वित्तीय लक्ष्य के अनुसार ही निवेश का फैसला लें।




